Wednesday, April 15, 2020

उत्तरप्रदेश से अन्जना झा की रचना- समय का बदलता रूप

अन्जना झा
नोएडा (उत्तर प्रदेश)
समय का बदलता रूप


अधीर मत हो मन
ये समय भी गुजर जाना है
डर है मन में जो आज,आज नहीं तो कल गुजर  जाना है ।
बे वक़्त के इस मेहमान को आज बाहर भगाना है
ना चाहते हुए भी स्वयं को क़ैद  करवाना है।

धैर्य रख,जोश में होश नहीं गवाना है
अब ना कभी अपनों से दूर जाना है।

एक समय वो भी था जब घर में रहने का समय ना था
अपनों के लिए वक़्त ना था
सोमवार को रविवार का इन्तेजार था
और रविवार तरसा-तरसा कर दस्तक देता था।

आज सप्ताह के सातो दिन एक हैं, फिर भी मन बाहर की जहरीली हवा खाने को बेचैन है।
इस बेचैनी को यहीं रोकना  होगा
घर में रहते सबको सुरक्षित रखना होगा।

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