Tuesday, April 7, 2020

उत्तरप्रदेश से गीतांजली वार्ष्णेय"सूर्यान्जली" की रचना- होंसला

गीतांजली वार्ष्णेय"सूर्यान्जली"
उत्तर प्रदेश
"होंसला"

  होंसला
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रख हौसला ,उजाले की भी बात होगी,
सब्र का बाँध बांध लो जरा,इन अंधेरों की भी प्रभात होगी।।
आया संकट टल जाएगा,खुशियों की फिर बात होगी।
अभी दूर से बात करलो,फिर दोस्तों से मुलाकात होगी।
शत्रु को हराने की कोशिश तो कर,हौसलों से मंजिल आसान होगी।
दुश्मन मुँह फैलाये खड़ा है,कुछ कदम पीछे चल,फिर हौंसलों की उड़ान होगी।।
वक्क्त की आंधी है,थम जाएगी
रख हौंसला, सफल कोशिशें होंगीं।।
  गीतांजली वार्ष्णेय

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