०२. राज्य- असम
०३. कविता का शीर्षक- क्षितिज
०४. सम्पर्क नम्बर- 9435030401
ll क्षितिज ll
प्रचंड प्रबाल हैं इतना वेग
हिल रहा हिमालय का तेज़
अँगार बन बरस रहा
जल प्रपात कोहराम का सेज़
भष्मीभूत हो भभक रहे
अरण्य नगर और खेत
भीभिषका लाली दानव रूप धरे
तटस्थ खड़ा ज्वालामुखी यमदूत बने
पसरा मातम कायनात रौद्र रूप धरे
अग्रसर सृष्टि इंतकाल मुख खड़े
पटाक्षेप तांडव लहरें
कर अस्त भाग्य कर्म
मरणासन्न शैया क्षितिज ओर चले
क्षितिज ओर चले ll
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