राज्य - उत्तर प्रदेश
कविता का शीर्षक - दोहे और कुण्डलियां
संपर्क नंबर- ७३१०२२५०६९
दोहे
दूर कोरोना से रखे, साफ सफाई मीत।
हाथ मिलाने से डरो, पार करोगे जीत।।
भारत आया है अगर, डरो ना इससे मित्र।
मात दिलाएंगे इसे, जिसका दिखे ना चित्र।।
मास्क पहने काम से, उतना जाएं आप।
जिससे भूखों ना मरें, और न हो संताप।।
हवा में फैले न कभी, कोरोना का रोग।
बचे रहें अफवाह से, करते हैं जो लोग।।
ताजा भोजन कीजिए, रहो स्वस्थ भरपूर।
तभी करोना आपसे, भागेगा कुछ दूर।।
कुंडलिया छंद
विदित सभी को हो गया, कोरोना का राज।
देखो फैला चीन से, जिसका नहीं इलाज।।
जिसका नहीं इलाज, अभी तक पूरी दुनिया।
उतरे इसका ताज, सुनो जी कहती मुनिया।।
कह सत्तू विकलांग, पास न आयेगा कभी।
हुए यहाँ सब लोग , करोना से विदित सभी।।
भाषणबाजी हो रही,सुन उर उठती हूक।
व्यक्ति मगर रोते दिखें, बिन रोटी दो टूक।।
बिन रोटी दो टूक, फिरे वो मारे - मारे।
लोग हुए घर कैद, मिले न कोई सहारे।।
कहता कवि सत्येन्द्र,लाॅकडाउन हम राजी।
पर कर जन सहयोग, तभी हो भाषणबाजी।।
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