Tuesday, April 7, 2020

छत्तीसगढ़ से जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले' की सार छंद में रचना

जगतसिंह ठाकुर 'बंजारीवाले'
सारंगढ़ , रायगढ़ { छग }

---<<०: बचना कोरोना से घर में रहना :०>>---
               ०××× सार छन्द ×××०
कोरोना से  बचना  है तो , घर  में  रहना  भाई ।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी  भलाई ।।
कोरोना   रही   महामारी , है  घातक   बीमारी ,
हल्के में मत लेना इसको , रखें सब समझदारी  ।
आओ इसे मिलके  हरायें , बनके     उत्तरदायी ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी  भलाई ।।१
कोरोना  से  बचने को लें , हम  संकल्प जरूरी ,
हमें संयम  रखना  पड़ेगा , सामाजिकता   दूरी ।
भीड़भाड़ में जाना-आना , मौत की  रही खाई ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी  भलाई ।।२
कोरोना  को  चलो हरायें , रखें  हम  सावधानी ,
नहीं तो  याद आ आयेगी , निश्चय अपनी नानी ।
इसके आगे  नहीं  चलेगी , किसी की है ढिठाई ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी  भलाई ।।३
कोरोना  हाथ  मिलाने से , बढ़ते  रहती   आगे ,
देख सफाई भय के  मारे , भीख प्राण की माँगे ।
बार-बार साबुन से करना , हाथ की  है सफाई ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी  भलाई ।।४
कोरोना   गंदगी   देखके , वार  करती   हमेशा ,
नाक-मुँह-नैन को छूने से , बढ़  जाती   अंदेशा ।
इससे  बचनेवालोंपर   है , करती  नहीं   चढ़ाई ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें   छुई   भलाई ।।५
कोरोना  फैली  जगती में , बनी   है    महामारी ,
उससे  हमें  बचा  पायेगी , सावधानी     हमारी ।
घर में सारा समय गुजारो , कर  सद्ग्रंथ  पढ़ाई ।।
तालाबंदी को  सब मानो , इसमें  छुपी   भलाई ।।६
                     ०××××××××××

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