रचनाकार--पवन गौतम बमूलिया
विषय /शीर्षक-
जय परशुराम जय अक्षय तृतीया
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----- भगवान परशुराम स्तुति
💐पुरुष महा परुषा प्रबल अग्नि ईश अवतार भए।
अक्षय तृतीया प्राकट्य तिथि तेजपुंज साकार भए।।
जय परशुराम जय परशुराम अंशब्रह्म आकार भए।
मार्तण्ड अरु विवस्वान ज्वाज्वल्य धर्म औंकार भए।।
जमदग्नि ऋषि रेणुका सुत रिपुसूदन भवतार भए।
अलक निरंजन परम् तत्त्व अविनाशी दातार भए।।
चिरंजीव त्रिभुवनेश्वर योगी अक्ष पिनाकवार भए।
सत्यम शिवम भक्त महा त्रेलोक्य सनातन तार भए।।
सप्त खण्ड चौदह भुवन अण्ड पिण्ड अवितार भए।
अखिल विश्व भूमण्डल रक्षक पाहिमाम सुखसार भए।।
सन्त,देवता,ब्रह्म,अवनि,अरु गो माता कृपाकर भए।
मत्स्य,कूर्म,वराह,वामन,नरसिंह श्रृंख अवतार भए।।
गंग जमुन कावेरी कृष्णा नर्मदे रस जलधार भए।
भू,जल,अग्नि,वायु अरु व्योम शिखा मूलाधार भए।।
मूल,स्वाधिष्ठान मणि आज्ञा स्वाधि सहस्त्रवार भए।
स्निग्ध धवल योगी,बैरागी,भक्तन प्रेमागार भए।।
अकथ अगोचर सनत पुरोधा महन्त महाआगार भए।
भीष्म द्रोण कर्ण गुरू श्रीराम भक्त अविकार भए।।
ब्रह्म पूर्वज चतुर्युगी नारायण षष्ठम अवतार भए।
गौतम करे प्रणाम स्वीकार करो करतार भए।।
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-पवन गौतम बमूलिया।
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