2.राज्य-उत्तर प्रदेश
3.शीर्षक-दोहे
4.संपर्क नंबर-
ज्यों कोटर तोता छुपा, वैसे घर में लोग ।
जो फैले संसार में,कोरोना का रोग ।।
ज्यों कोटर से झाँकता, तोता है संसार ।
वैसे झाँकें लोग सब, कोरोना का वार ।।
मुलुर-मुलुर तरु छिद्र से, तोता रहा निहार ।
सोच रहा कितना बड़ा, होगा यह संसार ।।
तोता कोटर में करे, रक्षा का अनुमान ।
वैसे ही घर में करो, तुम भी अब इंसान ।।
शुग्गा कोटर में छुपा, जैसे देखे सीन ।
वैसे देखे आजकल, मानव होकर दीन।।
bahut sunder dohe, sister
ReplyDeleteसमसामयिक दोहे। कोरोना कविताओं में भी व्याप्त हो गया है। लगभग हर १० में से २ कविताओं में इसका प्रसंग है।
ReplyDelete