Monday, March 16, 2020

छत्तीसगढ़ से देवव्रत कर शर्मा की रचना- छलिया

नाम  - देवव्रत कर शर्मा 
पता - मिथिलेश कर शर्मा, शिक्षक कालोनी भाटापारा चारामा, जि• कांकेर  छत्तीसगढ़ ।
संपर्क सूत्र- 7587373238
शीर्षक-  छलिया 

टुट गये हैं सपनों की तार 
उजड़ गये सपनों की साज।
कैसे गाऊं मै प्रेम का तराना 
विरहा में खो गयी है आवाज़ ।।

तुम बिन ख्वाब नही है मेरे मन मे
अगन सी लगी है आज मेरे तन में। 
बुझे दीपक मे रोशनी कहाँ से लाऊं 
चिराग कैसे जलाऊं इस जीवन में। ।

सावन की बदरी भी हो गयी छलिया 
पावस नीर को तरसती रही नदियां।
अनमने से मन में एक भय है समाया 
खुशी की तलाश में बीत गई सदियाँ। ।

कैसे भुला दूँ वो बचपन की कहानी 
प्यासी पपीहे सी तरस रही जवानी। 
चांद को सूरत मान लिया है तुम्हारी 
चकोर की तरह मस्ती भी है दिवानी। ।

आंगन में जुही जब खिल जाएगी 
चहकी डाल डाल पर इठलाएगी।
भ्रमर गीत मधुर सुनातें है कानों मे
बस आस है कि तु फिर आएगी। ।

**देवव्रत शर्मा **

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