राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"वो हाथ"
जेठ की चिलचिलाती धूप में
पत्थर तोड़ते हाथ
पसीने से लथपथ हाथ
किसी निर्माण में
सहयोग देने के लिए
ताबड़तोड़ चल रहे हाथ
कितने सुंदर लगते हैं
वो हाथ
पर कितने कुरूप लगते हैं
वो हाथ
जो वातानुकूल कमरों में बैठकर
दस्तखत करते हैं
उन कागज़ातों पर
जो किसी गरीब बस्ती के
उजड़ने का सबब बनते हैं
जो लाखों करोड़ों
भुखों के पेट पर मारते हैं लात
जो देते हैं निजीकरण का आदेश
करोड़ों बेरोजगार युवाओं को
करते हैं निराश
लगाकर रिक्रूटमेंट पर बैन
जो करते हैं सही
घोटालों के दस्तावेज
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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