शीर्षक-* करो_ना *
राज्य- मुंबई , महाराष्ट्र
सम्पर्कः- 9869081484
*करो_ना *
ज़िंदगी अब रेल के
सफ़र सी हो गयी है।
खुदका घर ही रेल की
बोगीसी बन गयी है ।
हर परिवार कुपे का
यात्री बन गया है ।
किचन पैंट्री बन गयी
सोफ़ा और बेड बर्थ हो गये ।
खाना, सोना और बातें करना ही
एक काम बन गया है ।
सफ़र तो कई साथ साथ कर रहे है
कोई भी किसीका हमसफ़र नही ।
एक दुजे को सब जानते तो है
पर शायद कोई पहचानता नही ।
यह सफ़र कितना लंबा है
कोई जानता नही ।
इसका मक़ाम कहा हो
किसीको पता ही नही ।
खिड़कियों के बाहर झांकें
तो मंज़र विराना नज़र आता है।
पेड़ पशु पक्षी फ़सले सब
व्यस्त और मस्त नज़र आते है ।
बस इंसान ही ना जाने
कहाँ ग़ायब हो गया है ।
चलती हुयी रेलसे देखो तो
सबकुछ तो चल रहा है ।
ना जाने क्यों यकायक
ज़िंदगी ही अचल हो गयी है ।
किसकी देन है या कोई श्राप
कैसी है ये अजिब सी बेचैनी ।
या कोई आंतक है फैला हुआ
या कायनाती आपदा ...
या है कोई बीमारी फैल गयी ।
ऐसे में मेरी भी एक है सलाह!
कुछ भी करे कोई
या करे आवारागर्दी !
जिसे उसकी नही परवाह !
पर तुम यह सब कुछ ना करोना !
इसी आफ़त का नाम ही है करोना !
किंतु इससे इतना भी डरोना !
अपने कुपेसे बाहर निकलो ना!
रखो सफ़ाई का ध्यान,
बनाये रखो आपस में दुरियाँ !
यही है इस आफ़तकी कमजोरीयॉ !
तब ना होगी ये हावी किसी पर
एक दिन फिरसे जियेंगे ख़ुश हो कर !
#संजय वासनिक “ वासु”
Badhiya hai
ReplyDeleteSuperb sir..
ReplyDeleteSachcha sandesh hai
ReplyDeleteKhubsurat panktiyan