राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"दिल तेरे लिए धड़कता"
लाख करो तीरथ
हजार करो धाम
माँ-बाप की सेवा बिना
बने नहीं कोई काम
माँ से बढ़कर कोई देवी नहीं
नहीं बाप से बढ़ के कोई देवता
बन जाये काम उसका
जो है इनको सेवता
सुना है इनके आशीष को
भगवान भी नहीं टालता
माँ एक ऐसी देवी
जिसे हर फूल लगे प्यारा
अपना सबकुछ दे दो
कहाँ क्या है तुम्हारा
बाप एक ऐसा देवता
हर पल तेरी खुशी है चाहता
तेरी जीत को अपनी जीत मानता
तेरी ख़ुशी के लिए हर दर्द सहता
मत दुखाओ दिल इनका
जो तेरे लिए ही है धड़कता
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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