Thursday, March 5, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- होली

कवित्री - नलिनी बाजपेयी
🎊🩸शीर्षक -*होली*🩸🎊
      राज्य - छत्तीसगढ़
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होली आई होली आई
गोकुल से कान्हा की टोली आई।            
ढ़ोल मंजीरा बाजे फाग,
ने धूम है मचाई।

धरती ने प्यारी छवि है पाई,
इंद्र धनुषी छटा है लहराई।

रंग गुलाल पर 
टेसू ने रंग लगाई,
ग्वाल बाल लिए संग
कान्हा ने रास रचाई।

शीत की बिदाई,
बसन्त की अगुवाई,
सूरज की किरणों ने 
तेवर है दिखाई।

राधा गोरी कृष्ण श्यामल देख 
मधु रूप मन हरषाएँ,
रजत कलश रंग भरे खुशियों
ने अबीर उड़ाएं।

प्रभु छवि निरख-निरख 
सखी सब हुलसाएं,
भांग ,गुझिया, ठंडाई का
सरूर रस घोले।

रुनझुन-रुनझुन 
गोरी केपायल बोले,
अंगों की थिरकन 
बतरस वाणी बोले।

धरती हुई सराबोर,
अंबर में सजी रंगोली,
पिय गए परदेश सखि 
कैसे मनाऊँ मैं होली ।

होली आई होली आई
गोकुल से कान्हा की टोली आई।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ .ग.).....

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