राज्य - छत्तीसगढ़
शीर्षक- सफर
जीवन के सफर में,
आनी अनजानी डगर में,
रोज मुसाफिर है सारे।
जब तक है सांसो की डोर
तब तक जीवन छोर,
कम समय है अपना
अरे छोडो़ दिवास्वप्ना।
तेरा- मेरा करते ही
रोज मरते -मरते ही,
बीते न सफर सुहाना।
छेड़ो न राग पुराना
मनु की संतान हो,
मनुष्य तुम महान हो
गीत प्रेम के गाते चलो
सफर में गुनगुनाते चलो।
जीवन के सफर में,
जानी -अनजानी डगर में
रोज मुसाफिर हैं सारे।।
रश्मि विपिन अग्निहोत्री
केशकाल जिला कोण्डागांव
बेहतरीन काव्य सृजन किया है रश्मि ।बधाई आपको ।
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