Wednesday, February 19, 2020

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- प्रेम

नाम-नलिनी बाजपेयी  
   शीर्षक;-प्रेम 
 राज्य-छत्तीसगढ़   
                             
        
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कैसे बता दूं 
तुम्हें प्रेम की भाषा,
अगम,अथाह,असीम
इसकी परिभाषा।

सर्द रातों की
स्निग्ध ज्योत्स्ना से,
भरी थी दिलकश 
तारों भरी रात।

गिरि, कन्दराओं की 
निर्झर सी बहती प्यास,
शिशिर के दामन से झांकता 
सूर्य का मृदु प्रकाश।

अथाह जलधि में डूबते उतरते 
को ज्यों पतवार की आस,
मधुवन में हरित द्रुमों के बीच 
कल्पतरु का एहसास।

बैठी हिंडोले पर प्रेयसी 
और गाती मधुमास,
प्रेम कालिदास की मेघदूत को
भेजता फरियाद।

बिहारी की सतसई,खैयाम की 
रुबाई का देता आभास,
महादेवी की अतृप्त प्यास,
वेदना से गूंजता आकाश।

पन्त की प्रकृति से चुराती 
कोमल मधुर आगाज,
मीरा की भक्ति से 
ज्यों संसृति होती नाराज।

कैसे बता दूं
तुम्हें प्रेम की भाषा,
अगम,अथाह,असीम है 
इसकी परिभाषा।
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     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ. ग.)

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