Monday, February 3, 2020

बिहार से कुमारी आरती की रचना- दहेज

नाम- कुमारी आरती
क्षेत्र- दरभंगा (बिहार)
शीर्षक- दहेज

कोरा अभिशाप है दहेज,
फिर भी लोग क्यों चाहते हैं दहेज ।
दहेज एक जटिल समस्या है, 
पैसे देकर भी बेटियों को,
 लोगो ने गंवाया है ।

आज शादी का दूजा नाम ही है दहेज ,
दहेज नहीं तो शादी नहीं,
इसीलिए तो शादी का नाम है दहेज
दहेजों के नाम पर बेटियां बिक जाती है
जख्म खा खाकर भी वो मुस्कुराती है
इस जहां में जब तक दहेज का नाम रहेगा 
हर मानव दहेज के नाम पर ,
नारियों का सौदा करेगा  ।

जन्म लेते ही बालाओ को मार दिया जाता है ,
शायद इसीलिए की दहेज के नाम पर ,
उन पर सर्वस्व लूटा दिया जाता है ।
इसमें बालाओं की क्या दोष है ?
जबकि दहेजो का ही यह देश है,
जबकि दहेजो का ही यह देश है।

बेटियां  कई चली गई अपने प्राण त्याग कर,
फिर भी न लज्जा आयी ,
किसी को दहेज मांग कर ।
दहेज को शादी से दूर रखना है,
बिन दहेज ही शादी सबको करना है ।
हम नारियों का यही संकल्प है कि
दहेज का यह रस्म पुराना है,
किसी के घर बिना दहेज ही जाना है ।
किसी के घर बिना दहेज ही जाना है।

कुमारी आरती 
दरभंगा (बिहार)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...