Monday, February 3, 2020

छत्तीसगढ़ से संतोष श्रीवास्तव "सम" की रचना- बसंत

नाम - संतोष श्रीवास्तव "सम"
राज्य - छत्तीसगढ 
मोबाइल - 9993819429
शीर्षक --बसंत बन जाये। 
      बसंत बन जाये
यह जीवन, 
कोई बसंत है, 
मेरे लिए, 
तुम्हारे लिए ।
बसंत में टेसुओ के फूल, 
हमारे अरमानों के फूल है, 
पीली सरसों, 
हमारे जीवन की उमंगे है, 
आम पर लगे बौर, 
आमंत्रण है, 
जीवन में खुशियों के। 
आओ बसंत की बेला मे, 
अपना जीवन, 
रसमय बना लें, 
भूल जाये सब कुछ, 
जो इसके बिना थे।
अब तो, 
तुम और मै, 
याने हम दोनों, 
बसंत बन कर जीये।
चाहे कोई भी ऋतु आये, 
हमारे जीवन से, 
अब यह बसंत न जाये, 
कभी भी न जाये।। 
  -- संतोष श्रीवास्तव "सम "
        बरदेभाटा, कांकेर छग

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