Tuesday, February 4, 2020

राजस्थान से पवन गौतम की रचना- जीवन चक्र

राज्य-राजस्थान।
रचनाकार-पवन गौतम
विषय-
जन्म मृत्यु एवं आत्मा
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जन्म.. 
जन्म.. 
जन्म करता है भेद... 
निम्न का उच्च का..
जाति का लिंग का..
सरलता का जटिलता का.. 
धर्म का अधर्म का !
यहाँ का वहाँ का..
पृश्यता अपृश्यता का.. 
पूर्णता का रिक्तता का !!
किन्तु... 
किन्तु...

मृत्यु..
मृत्यु..
नहीं करती किंचित द्वेष 
पंथ से धर्म तक.. 
सूक्ष्म से विराट तक..
बिन्दु से ब्रह्मांड तक !
केन्द्र से परिधि तक..
लोक से परलोक तक.. 
अण्ड से पिण्ड तक !!

उपनिषद निगमागम..
सब व्याख्या करते हैं..
जन्म से मृत्यु तलक 
मृत्यु से अमरत्व....
और पुन:पुन: अन्वेषण. 
परिक्रमण पुनश्च भ्रमण! 

मृत्यु तिरोहित होना है... 
क्षण भर के लिए.. 
परिवर्तन है परिवेश प्रकृति 
का.. 
हाँ मृत्यु अजानता में दर्द 
आबद्ध होती है.. !

वस्तुत :मृत्यु व्यक्ति 
की काया के नष्ट होने का 
दु:खद अध्याय है यादों के 
लिए..
शेष अशेष.....
स्मृति बद्ध होती है..!! 

गृह  नक्षत्र चन्द्र पृथ्वी.. 
की प्रकुंचन प्रक्रिया !
अणु परमाणु 
प्रोटॉन न्यूट्रॉन इलेक्ट्रान 
जीव और परमात्मा की 
सुव्यवस्थित अन्त:क्रिया !!

मन चित्त बुद्धि वृत्ति प्रवृत्ति 
प्राण कोष विज्ञान 
विग्रह...
आनन्द की खोज विश्वात्मा 
परमात्मा..!

क्या यही है  चेतना 
जागृति 
आत्मा...!!

कहाँ है आत्मा यक्ष प्रश्न ?

सुख से आनन्द महानन्द, 
नित्यानन्द तक की यात्रा.. 

दृष्टि तुम्हारी... 
दृश्य तुम... 
दृष्टा हो तुम.. !

यात्री  तुम.. 
यात्रा तुम..
पथ भी तुम.. 
गन्तव्य भी तुम,,,!!

हाँ,, शायद यहीं कहीं 
विलुप्त है आत्मा.. 

बूँद से सागर बनने के 
लिए..
पुष्प से गंध होने के लिए.. 
नश्वरता से ज्योतिर्मय होने 
के लिए...

स्व से परम में समाहित 
होने के लिए...! 

हाँ हाँ!  वही है परम चेतना 
परम आत्मा ...!!
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