पता - पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
शीर्षक - आज का प्रेम
सम्पर्क-9098518976
आज का प्रेम
पावन प्रेम की परिभाषा , मीरा से सीखो तुम ,
गोविन्द पे मरकर भी ,ज्यों का त्यों दिखो तुम ,
आकर्षण को प्रेम समझना तो , लोगों की नादानी है ,
प्रेम तो है दिल रोते में भी , हँसते दिखो तुम ,
सुजान की उलाहना को , घनानंद ही सह पाए ,
मीरा के गिरधर तो , मीरा ही को भाए ,
पर न समझे कोई जब , दिल दर्द मोहब्बत का ,
फिर यह सौदा है यारों , ये कैसे प्रेम कहलाए ?
प्रेम दिखावा है ,पैसा है, मान हो गया है ,
प्रेम दुकानों में बिकता कोई ,समान हो गया है ,
प्रेम की कीमत अब , हर कोई लगा लेता है यारो ,
क्योंकि बागों में दिखता ए ,आसान हो गया है ,
प्रेम कभी हृदय की गहराई में , उतारना होता था ,
एक-दूजे में डूबकर फिर ,उबरना होता था ,
त्याग होता था , आँसुओं का समंदर कभी ,
प्रेम में दर्द सहना ही , सवरना होता था ,
आज का प्यार नीजि नही है ,तब प्रभावी है ,
इसमे दोष किसी का नही , इनमें बाजार हावी है ,
आज का हाल ए है तो तुम सोच लो यारो ,
हमतो इतने ही ठहरे हमसे आगे भावी (भविष्य का)है ,
- शैलेन्द्र चेलक -
Thanks ji
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