राज्य- पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"कुसुम को खिलने दें"
हर साल आती है माँ दुर्गा
असुरों का संहार करने
संहार करती है चली जाती है
असुर फिर भी बढ़ते रहते हैं
दशहरा मनाया जाता है
रावण जलाया जाता है
फिर रावण बढ़ते ही जाता है
सीता की तरफ नजरें गड़ाये रहता है
तो क्या राम धनुष पर बाण चढ़ाना भूल गए हैं
या कोई विभीषण नहीं मिल रहा है
रावण को मारने का उपाय बताने के लिए
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रावण कहीं बाहर नहीं
हमारे आपके अंदर ही तो है
आइए हम अपने अंदर के रावण को मारे
असुरों को दूर भगाए हम
माँ दुर्गा को थोड़ा करने दे आराम
निर्भया को निर्भय होकर
घूमने दें सड़कों पर
दामिनी को बेखौफ होकर
दमकने दे वातावरण में
बिजली को चमकने दें नील गगन में
कुसुम को खिलने दें चमन में
बिटिया को चहकने दें आँगन में
नारी को सम्मान दे उसके जीवन में
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
अति उत्तम
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