राज्य-पश्चिम बंगाल
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शीर्षक-"गर्व करो"
गर्व करो हिंसा नहीं
प्रेम करो द्वेष नहीं
दोस्त की उन्नति पर भी
मस्ती करो
दुश्मनों से भी दोस्ती करो
पड़ोसी के घर
जलेगा दीप तो रोशनी
आपके घर भी आएगी
पड़ोसी के घर में
लगेगी आग तो
तेरे घर भी आएगी
उसकी आँच
बोलो है न ये बात साँच
अगर करोगे किसी का खून
तेरे दमन पर भी
आएंगे छीटें
अगर पहनाओगे
किसी को हार तो
फूलों की खुशबू
आएगी तेरे भी पास
इसलिए भलाई करो
बुराई नहीं
गर्व करों हिंसा नहीं
प्रेम करो द्वेष नहीं
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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