छत्तीसगढ़
मैं भारत का बेटा हूँ
सागर ,धरती,पर्वत,जंगल, सबका मैं वंदन करता हूँ।
मैं गगन,पवन अनल भरकर, साँसों को पावन करता हूँ।।
शिवशक्ति प्रबल प्रेरक मेरे, मानस में राम समाहित हैं।
कोटिशः बल भुजंग लिए हूँ,
कर्मों में कृष्ण प्रवाहित हैं।।
ज्ञानी,ध्यानी संतों को,अपने रग रग में भरता हूँ।
धरती ,सागर पर्वत जंगल, सबका मैं वंदन करता हूँ।।
राणा ,सांगा आल्हा -ऊदल,
हुंकार वीरता भरते हैं।
अखंड ,प्रचंड ज्वाला भारत,
सीता,सावित्री सुत मिलते हैं।।
मैं भारत का बेटा हूँ, वीरों का चिंतन करता हूँ।
धरती,सागर,पर्वत जंगल, सबका वंदन करता हूँ।।
मैं विस्मिल ,आजाद वंशज हूँ,
मेरा परिचय असीमित अटल।
गंगा माँ का तप वंशज हूँ,
महावीर अंश हूँ प्रभुता प्रबल।।
मैं भीष्म प्रतिज्ञा, जीवन ले, सर्वस्य समर्पण करता हूँ।
धरती सागर, पर्वत ,जंगल, सबका वंदन करता हूँ।।
याद दिलाकर बता रहा हूँ,
अदम्य कर्म साहस भरकर।
पहचान मिटाने वालों को,
अभेद्य वार-प्रहार भरकर।।
यही बताने पुनः आया हूँ, दुष्टों का तर्पण करता हूँ।
धरती,सागर पर्वत ,जंगल, सबका मैं वंदन करता हूँ।।।
बरसों से पीड़ा झेले हम,
कश्मीरियत को खाक किया।
बेघर अपने सब हो गए है,
आजादी मेरी लूट लिए
हिन्दुस्ताँ कोअलगाव दिया।।
मैं थाम तिरंगा कफन लिए, पत्र वचन का भरता हूँ।
साँसों धड़कन में मिट्टी है, माँ चरणों को वंदन करता हूँ।।
स्वरचित ©®
अमिता,रवि दूबे
छत्तीसगढ़
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