शीर्षक-आंखें
राज्य-छत्तीसगढ़
मां की ममता की याद में
रोती बिलखती हैं आंखें।
पिता के दुलार को याद कर
डबडबा जाती हैं आंखें।
भाई-बहनों की शरारतें याद
कर मुस्कुराती हैं आंखें।
प्रेम का इजहार सुन कर
बहक जाती हैं आंखें।
विरह की असीम वेदना में
तड़प जाती हैं आंखें।
जीत की हर खुशी में
चहक जाती हैं आंखें।
यातनाओं की तपिश में
झुलस जाती हैं आंखें।
शहीदों की कुर्बानी देख
भर आती हैं आंखें।
मौत के आगोश में
मूंदा जाती है आंखें।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर
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