रचनाकार-
पवन गौतम बृजराही बमूलिया ।
-----------------------
मकर संक्रांति(गीत)
***************
कहीं पतंग उड़ाई जाए।
कहीं लावणियां झलकाए।
सूरज अपनी दिव्य छटा को..
जन जन तक रश्मि पहुँचाए।
नए वर्ष में खुशियाँ लाए......
सबको मकर सक्रांति भाए।।
-------
कहीं लाहिड़ी नाम पुकारे।
पोंगल कहकर इसे उचारे।
स्वर्ण भास्कर हो उतरायण...
विवस्वान मार्तण्ड नज़ारे।
फसलें खेतों में लहलाए.......
सबको मकर संक्रांति भाए।।
--------
सूर्य दिवाकर का उजियाला।
आदित्य, दिनकर बन मतवाला।
रश्मिरथी दिनेश की आभा........
दूर करे सारा अँधियारा।
तिथि ऋतु मौसम चक्र चलाए......
सबको मकर संक्रांति भाए।।
------
पवन गौतम बृजराही बमूलिया
---
No comments:
Post a Comment