Monday, January 6, 2020

उत्तराखंड से ओम प्रकाश फुलारा"प्रफुल्ल" की रचना- मनहरण घनाक्षरी

ओम प्रकाश फुलारा"प्रफुल्ल"
बागेश्वर उत्तराखंड
9411583467
मनहरण घनाक्षरी

तेरी कोख न लजाऊँ, चाहे मैं ही मिट जाऊँ,
भारती की सेवा में ही, जीवन बिताना है।

फैला है जो भेदभाव, बढ़ा रहा नित पाँव,
पावन धरा से इसे, मुझको मिटाना है।

मार्ग से भटक रहे, आज सभी लोग यहाँ,
भटके हुओं को अब, मार्ग भी दिखाना है।

अधरों पे आज अब, हँसी नही खिलती है,
मुरझाए चेहरों को, मुझको खिलाना है।

ओम प्रकाश फुलारा "प्रफुल्ल"

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