राज्य - छत्तीसगढ़
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कविता :-
आज कल
दिखते नहीं
वो खेल
लोगों में मेल
वो पतंग
वो झूले
वो रेत के घरौंदे
कागज की कश्ती
बारिश का पानी
नानी की कहानी
तारों भरी रात
ध्रुव तारा
तारों का टूटना
आग का अलाव
खेत खलिहान
गांव का किसान
अपने मेहमान
बर्फ का गोला
लड़कों का टोला
बाइस्कॉप दूरबीन
पर्दे का सीन
भजन कीर्तन
चंदामामा चंपक
मुक्ता - कादंबरी
खेलना अंताक्षरी
जाने कहां हो
गए विलुप्त...
इनकी जगह
ले ली है एक
ऐसा खिलौना
नाम है जिसका
मो बा ई ल...!
- एस के नीरज
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