Monday, January 6, 2020

उत्तराखण्ड से संदीप सिंधवाल की रचना- नागरिकता अधिनियम (दोहा)

कवि - संदीप सिंधवाल
शीर्षक - नागरिकता अधिनियम (दोहा)
राज्य - उत्तराखंड (रुद्रप्रयाग)
संपर्क - +6757822776



भारत शरण आहें जो, राखे उसकी लाज।
हिंदुत्व का विधान है, फूले सबका राज।।

उधर से देश निकाला, इधर मिली दुत्कार।
प्रताड़ित भागे लोग, जाएं भी किस द्वार।।

अपना देस विशेष है, जहां हिन्दू अपार।
जीने की उम्मीद जगे, जिनके ना घरबार।।

घर के दंगे घर तक हि, ना देखे संसार।
एक देस आपका भी, तो रहें मिलनसार।।

आपस में भिड़ा कर ही, नेता हैं मजबूत।
हो अगर यहां के आप, तो दे उन्हें सबूत।

मन में सोच 'सिंधवाल', कौन सच से अनजा'न।
बाकी है सब बाद में , पहले देस की शा'न।।

संदीप सिंधवाल

9 comments:

  1. गजब भाई जी गजब जय हिंद धन्यवाद

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. बहुत ही सुंदर रचना संदीप भाई आपसे एक सवाल पूछना था कि आप कहां के रहने वाले हो

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी, मै रुद्रप्रयाग का रहने वाला हूं।

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  3. Bahut si sundar line likhi hai apne,

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    1. जी धन्यवाद आपका

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  4. Replies
    1. धन्यवाद जी

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  5. नागरिकता अधिनियम का पूर्ण समर्थन दें।

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