शीर्षक - नागरिकता अधिनियम (दोहा)
राज्य - उत्तराखंड (रुद्रप्रयाग)
संपर्क - +6757822776
भारत शरण आहें जो, राखे उसकी लाज।
हिंदुत्व का विधान है, फूले सबका राज।।
उधर से देश निकाला, इधर मिली दुत्कार।
प्रताड़ित भागे लोग, जाएं भी किस द्वार।।
अपना देस विशेष है, जहां हिन्दू अपार।
जीने की उम्मीद जगे, जिनके ना घरबार।।
घर के दंगे घर तक हि, ना देखे संसार।
एक देस आपका भी, तो रहें मिलनसार।।
आपस में भिड़ा कर ही, नेता हैं मजबूत।
हो अगर यहां के आप, तो दे उन्हें सबूत।
मन में सोच 'सिंधवाल', कौन सच से अनजा'न।
बाकी है सब बाद में , पहले देस की शा'न।।
संदीप सिंधवाल
गजब भाई जी गजब जय हिंद धन्यवाद
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद
Deleteबहुत ही सुंदर रचना संदीप भाई आपसे एक सवाल पूछना था कि आप कहां के रहने वाले हो
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद जी, मै रुद्रप्रयाग का रहने वाला हूं।
DeleteBahut si sundar line likhi hai apne,
ReplyDeleteजी धन्यवाद आपका
DeleteVery nice
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteनागरिकता अधिनियम का पूर्ण समर्थन दें।
ReplyDelete