राज्य-दरभंगा ,बिहार
शीर्षक-उपहार
*उपहार*
मेरे जीवन का ये अनमोल उपहार है
आपका जो मिला मुझे यूँ प्यार है।
कितनी कीमती है ये समझे कौन?
कि मेरे जीवन मे आई बहार है।
मेरे जीवन का ये अनमोल उपहार है।
आपने मेरे गीत को साज दिया।
राह मे पीछे से मुझे आवज दिया।
आपको पा कर मेरे दिल को करार है।
मेरे जीवन का ये अनमोल उपहार है।
डूबते वक्त की लहरों को चुरा कर ।
जैसे किसी बेजान पंछी को उड़ा कर।
हाथों मे लिया मेरा जीवन पतवार है ।
मेरे जीवन का ये अनमोल उपहार है।
फूलों पर उड़ते भवरों की गुंजन वो।
मेरे हृदय मे बसे हुए रंग बिरंगे उपवन वो।
मेरे दिल मे बसे उनके गीत का चित्रहार है।
मेरे जीवन का ये अनमोल उपहार है।
कंचन प्रभा
दरभंगा
बिहार
Nyc
ReplyDeleteSo real and innocent thoughts you have . Specially the third paragraph. Loved it. Looking forward to read and enjoy more of your thoughts Bravo!!
ReplyDelete💕💕💕💕💕💕💕💕💕
DeleteGood
ReplyDeleteLoved it because this poem is dedicated for me.
ReplyDeleteYes 💕💕💕💕💕💕 you are right
DeleteBeautiful as ur thoughts
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