Monday, January 20, 2020

बिहार से रुपेश कुमार की रचना- सिर्फ लाल

कवि का नाम ~ रुपेश कुमार
शीर्षक ~ सिर्फ लाल 
राज्य ~ चैनपुर , सिवान , बिहार
सम्पर्क ~ 9934963293

मेरी माँ ने एक बार कहा था ,
बेटे जहाँ गणतंत्र का झंडा ,
फहराया जाये ,
26 जनवरी को ,
वहाँ ! उस जश्न मे मत जाना ,
उस झंडे के नीचे मत जाना ,
ये सफेदपोश ,
उस झण्डे को दागदार कर दिये है ,
हर साल इसकी छाया मे ,
इसके साथ बलात्कार करते है ,
जर्जर बना दिये है इसे ,
अब टूटने ही वाली है  - यह आजादी !
सुनो बेटे ! यह सुनो बेटे ! सुनो - 
यह गीत किसी कवि का है -
"बाहर न जाओ सैया ,
यह हिन्दुस्तान हमारा ,
रहने को घर नही है ,
सारा जहाँ हमारा है" ,
रेडियो पर सुनते ही यह गीत ,
मै ठठा कर हंसा था ,
और माँ से कसम लिया था -
जब तक मै मुखौटे नोचकर ,
इनका असली रूप / तुम्हारे सामने, 
नही रखूँगा ,
लानत होगी मेरी जवानी की ,
धिक्कार होगा मेरे खून का ,

इस झंडे को ,
अब बिल्कुल लाल करना होगा माँ ,
तुम मुझमे साहस भरो ,

लाल क्रान्ति का आह्वान दे रही है माँ ,
ताकि तिरंगे के नीचे कोई रंग न हो ,
कोई रंगरेलीया न हो ,
इसे एक रंग मे रंगना होगा ,
एक रंग मे सिर्फ लाल ,
सिर्फ लाल माँ !

सिर्फ लाल _ _ _ _ _ _

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