पता - श्रीमाधोपुर (सीकर) राजस्थान
शीर्षक - अंतर्मन की गूँज
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अंतर्मन की गूँज
अंत भले हो जाए पर जो
हार अंत तक ना माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने
बाधाएँ लाख मिले बेशक
बेशक बिछे हो अंगारे
हर मुश्किल से टकराकर जो
मुश्किल का हल पहचाने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने
गलती खुद से हो जाने पर
खुद की गलती स्वीकारे
गलती ओरों से होने पर
वो उनको ना धुतकारे
खुद की तरहा जो ओरों को
अपना ही रूप माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने
शत्रु का संहार करे
ना क्रोध से हाहाकार करे
वो लोहा ले जब शत्रु से
शत्रु भी हार स्वीकार करे
फिर क्षमा करके जो शत्रु को
मित्र सा अपना माने
वही आदि वही अनंत है
जो अंतर्मन पहचाने
नाम - राहुल कुमावत
कारीगर कलम का
Excellent
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