राज्य : झंझारपुर, मधुबनी,बिहार
संपर्क : 9934430045
शीर्षक : ऐसा सबेरा आये
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ऐसा सबेरा आये
एक ऐसा सबेरा आये,
जहाँ जाति न पाती हो ,
सच्चा इंसान नजर आये।
न कोई धर्म का झमेला हो,
मानवता का जहां मेला हो,
सहर्ष भाव झलके हर मन,
चेहरे पर खुशी नजर आए,
एक ऐसा सबेरा आये ।
सुबह की तरह शाम ढले,
घर छोड़ न कोई प्रदेश चले,
अपना गांव अपना देश बने,
हर हाथ रोजगार नजर आये,
एक ऐसा सबेरा आये ।
हर जन माँ भारती के पुत्र हैं,
जो करे उजाड़ वही कुपुत्र हैं,
मेरा देश शांति का प्रतीक है,
ईर्ष्या कपट नजर नहीं आये,
एक ऐसा सबेरा आये ।
विकसित हो भारतवर्ष ,
यहां सब आगे बढ़े सहर्ष ,
बस सब भारतीय ही हो ,
जन-जन में प्यार नजर आये,
एक ऐसा सबेरा आये ।
धरा गगन से आवाज आये,
एकता की गूंज शोर मचाये,
स्वार्थ की नहीं हो राजनीति,
सुख-शांति अधिकार नजर आये,
एक ऐसा सबेरा आये ।
वह सबेरा जल्दी आये ।
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कवि डॉ.संजीव शमा, झंझारपुर,बिहार
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