राज्य - राजस्थान।
संपर्क - 8769764786
विधा - मुक्तक
छंद - दोहा
प्रथम पूजूँ गणेश को, विघ्न-विनाशक जान।
दूजा सुमिरुँ आञ्जनेय,यशोबल बुद्धि मान।।
प्रथम बार दोहा लिखा, धरकर गुरु का ध्यान।
दोष मेरे निकालिए, ज्यों अंधकार भान।।
निर्भया को न्याय मिला, हुआ न्याय सिरमौर।
एक पापी छूट गया, यह पीड़ा है और।।
स्वतंत्रता किससे मिले? चोर मचाए शोर।
काश्मीर हिंद का सदा, चाहे लगालो जोर।।
बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
जय हो गणेशजी महाराज की .....जय ।
ReplyDeleteअति सुंदर
DeleteNice lines
ReplyDeleteGjb lines
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteधन्यवाद सभी साथियों का
ReplyDeleteश्री गणेशाय नमः
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया।
ReplyDeleteNice lines Guru
ReplyDelete😍😍😍
ReplyDeleteGreat
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