कवि का नाम- विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
शीर्षक:- अमरली बोट
मोबाईल: 07999566755
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"अमरली बोट.."
आपलो के चेपान डारा ढाक,
दूसर के पुटानी अंडकी दखाव,
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर..
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |
फोकहा-फोकहा बले,
दूसर चो इजित बोर,
उल्टा चोर कोतवाल के डाट,
तेबे होयदे तुचो जोर,
माटी तेल के बीक,
चाउर के खा,नोन के चाट,
गरीब पेट चो के नंगाव,
तेबे तुय करसे राज,
मान्तर...कोनी तो येदे..?
नाहटा हिटादे..तुचो रे ढोर |
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |
येबे गरीब गुंडा लगे जा,
बसुन सुख दुख ने गाग,
पेटे निहाय पीला,
मान्तर,पेट सेकूक लाग,
दूसर चो कर तीन पांच,
दूसर चो दखो लंदर फंदर,
दूसर चे के बल नांगड़ानाच,
आपलो भनभना गाडा़भर,
भांजा साग के बले तुय सागं झोर |
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |
बोट देउ,चाखना,भांजा खाउ,
केबे चेतासे तुमी ठापा लगाउ,
केबे मुं रपसा खादे,
बारा चो भाव ने जादे,
ये चेचान चोंडा नकटा ढोर,
खेदून मारा खोरे खोर,
तुमी बोट देउ,
नंगत माने के करा जोर,
नकटा नेता टांगरा चोरू,
दूसर बायले-घरे राती ओलू,
ये चुनई ने....झारून दीहा,
गोरोस-गोरोस पानी-पानी,
देवरानी जेठानी नीर खोर |
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |
विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
कोंडागांव,बस्तर,छत्तीसगढ़
Very nice dewangan ji
ReplyDeleteVery nice dewangan ji
ReplyDeleteBest hai dada
ReplyDeleteअति सुन्दर बस्तर की खुशबू लिए रचना है ।
ReplyDeleteसच हमें हमारी संस्कृति ,का हर काव्य मन को छू लेती है