Thursday, December 19, 2019

छत्तीसगढ़क से विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर की रचना- अमरली बोट

राज्य- छत्तीसगढ़
कवि का नाम- विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
शीर्षक:- अमरली बोट
मोबाईल: 07999566755
==================

  "अमरली बोट.."

आपलो के चेपान डारा ढाक,
दूसर के पुटानी अंडकी दखाव,
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर..
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |

फोकहा-फोकहा बले,
दूसर चो इजित बोर,
उल्टा चोर कोतवाल के डाट,
तेबे होयदे तुचो जोर,
माटी तेल के बीक,
चाउर के खा,नोन के चाट,
गरीब पेट चो के नंगाव,
तेबे तुय करसे राज,
मान्तर...कोनी तो येदे..?
नाहटा हिटादे..तुचो रे ढोर |

 तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |

येबे गरीब गुंडा लगे जा,
बसुन सुख दुख ने गाग,
पेटे निहाय पीला,
मान्तर,पेट सेकूक लाग,
दूसर चो कर तीन पांच,
दूसर चो दखो लंदर फंदर,
दूसर चे के बल नांगड़ानाच,
आपलो भनभना गाडा़भर,
भांजा साग के बले तुय सागं झोर |
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |

बोट देउ,चाखना,भांजा खाउ,
केबे चेतासे तुमी ठापा लगाउ,
केबे मुं रपसा खादे,
बारा चो भाव ने जादे,
ये चेचान चोंडा नकटा ढोर,
खेदून मारा खोरे खोर,
तुमी बोट देउ,
नंगत माने के करा जोर,
नकटा नेता टांगरा चोरू,
दूसर बायले-घरे राती ओलू,
ये चुनई ने....झारून दीहा,
गोरोस-गोरोस पानी-पानी,
देवरानी जेठानी नीर खोर |
तुय सकत भर चिचयाव,
फोकहा फोकहा बले
दूसर चो इजित के बोर...
अमरली बोट...
बाजली मोहरी ढोल |


विश्वनाथ देवांगन'मुस्कुराता बस्तर'
कोंडागांव,बस्तर,छत्तीसगढ़

4 comments:

  1. दिनेश कुमार विश्वकर्माDecember 19, 2019 at 9:34 PM

    Very nice dewangan ji

    ReplyDelete
  2. अति सुन्दर बस्तर की खुशबू लिए रचना है ।
    सच हमें हमारी संस्कृति ,का हर काव्य मन को छू लेती है

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...