रायपुर, छत्तीसगढ़
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अंतर
हमेशा नहीं पर हाँ कभी कभी होता है,
पूछूँ तुमसे कौन सा प्रेम सही होता है...
क्या प्रेम प्रेम में फर्क़ होता है??
समा ना पाई संसार में तुम्हारे,
जिसका संसार तुम से होता है....
जो आंसुओं को अनदेखा कर दे ,
शांत सौम्य बुद्ध वही होता है...
जो रिश्तों से निष्ठुर हो ठुकराए,
जीवन का श्रेय वही पाता है...
अनामिका उलझी हो जिसकी,
कोमल लटें संवारने में...
दिन रात न्योछावर हो जिसका
पुष्प एक सम्भालने में....
नैन भीगे रहें जिसके,
नन्हें स्वप्न सिरहाने में...
महान वो नहीं कभी होता है...
पूछूँ तुमसे कौन सा प्रेम सही होता है...
हमेशा नहीं पर हाँ... कभी-कभी होता है...
रश्मि...
भावनाओं की सुगढ अभिव्यक्त
ReplyDeleteसराहनीय रचना
ReplyDeleteप्रेम....गर हैं? तो बस एहसास...
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत कविता
अद्भुत वाकई इसका जवाब शब्दों में नहीं होता है। कितने बार पूछोगी कौन सा प्रेम सही होता है।
ReplyDeleteयूँ ही रचते रहिये। आपको अशेष शुभकामनाएं।....suyog
Thank you 🙏
ReplyDeleteहमेशा नहीं पर हाँ... कभी-कभी होता है.
ReplyDeletePrem ek anubhuti aur ek makhmali ahasas hota ha
ReplyDeleteThank you 🙏🙏
ReplyDeleteभावनात्मक अभिव्यक्ति
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