शीर्षक -पूष(पौष)
राज्य- छत्तीसगढ़
मो.नम्बर-
पूष (पौष)
पूष की रात जाहिर है,
ठंड की बरसात बरसाने में
माहिर है।
हेमन्त ऋतु में दिल ए बेताब,
तुझे तेरी यादों को भूलाएं
कैसे आफताब।
शीत में डूबी ठिठुरन भरी
सर्द रातें,
प्रियतम से हुई स्वप्न
में बातें।
घना कोहरे भरी स्याह
लंबी रातों की परतें,
धूप को तरसते,
सूरज को रहते जोहते।
सूरज की सौगात,
मादक है अहसास,
अच्छे स्वास्थ्य के लिए
ईश्वर ने बनाया पूस का
माह खास।
दिनकर का खूबसूरत
नवल प्रभात,
मन मे भर देता है
मृदु आभास।
सूर्य अर्चना
स्वास्थ्य वर्धक है इतवार,
आओ पूजे सूरज को
जीवन को ना बनाएं नागवार।
पूस की रात जाहिर है,
ठंड की बरसात
बरसाने में माहिर है।।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर ( छ.ग.)
Nice
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