पता - श्रीमाधोपुर (सीकर)
राजस्थान
शीर्षक - "कान्हा की मुरली"
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"कान्हा की मुरली"
कान्हा ने मुरलिया ऐसी बजाई
सुन गुजरिया दौड़ी आई
कृष्ण की धुन में ऐसी समाई
बीती सारी बात भुलाई
श्याम रंग में रंगी चुनरिया
बन गई देखो सब बावरिया
जल भर लाइ देखो गगरिया
मटकी फोड़ी क्यू सावरियां
मोहित छवि जहां से न्यारी
मन में समावे कृष्ण मुरारी
राधिका बनी श्याम की प्यारी
मीरा है हरी नाम दुलारी
मोरछड़ी अति सुन्दर लागे
हीरे-मोती मुकुट पर साजे
कान में कुंडल,हाथ बाजुबंध
और पैर पैजनिया बाजे
राग-रागिनी साज सुनावे
बांस-बांसुरी अधर लगावे
गोपियाँ धुन हरी नाम की गावे
मोहन जब मुरली बजावे
नाम- राहुल कुमावत (कवि,चित्रकार)
कारीगर कलम का
तनसुख अति सुन्दर।
ReplyDeleteजय कृष्ण कन्हाई लाल की जय।
Awesome ❤️👍
ReplyDeleteAwesome bro
ReplyDeleteNice poetry ��
ReplyDeleteGreat Poetry sir
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