राजनांदगांव
छत्तीसगढ़
गजल
वो मेरा था, मेरा है और मेरा ही रहेगा,
दिल को रस्मो रिवाजों से बगावत है और करेगा ।
दोस्त बनकर खंजर सा जख्म दिया जिसने,
उस दुश्मन से मोहब्बत है और रहेगा।
उसे पाने की तमन्ना तो न थी कभी।
पर उसे खोना ही किस्मत है और रहेगा।
सच को सच कहा तो बुरा हो गया,
तेरी नज़रों में यह हिमाकत है और रहेगा।
खता किसकी थी ये मत पूछ अब,
जुबां से मुकर जाना तेरी फितरत है और रहेगा।
जल ही जाते है परवाने अक्सर
शमां की खातिर,
जलना जलना ही उसकी शहादत है और रहेगा।
है नदी के दो किनारों सा जीवन उनका भी,
दूर होकर भी दोनों में बेहद कुरबत है और रहेगा।
माधवी गणवीर
bahut sundar
ReplyDeleteबेहतरीन
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