स्थान - लक्ष्मी नगर
(दिल्ली )
*** हादसा ****
एकरोज इन आँखों से दिल का हादसा हुआ ,
घायल हुआ हूँ कि अब मैँ सबकुछ भूल रहा हूँ |
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कुछ लोग समझते हैं की मैं हूँ खामोश एक अर्शे से ,
हाकिकत तो है मैं आँखों से सब मैं बोल रहा हूँ |
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आज हुआ हूँ,पत्थर इसकी भी कोई है वजह ,
ज़माने में अपने मैं भी गुलाब का फूल रहा हूँ |
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ये दुनियाँ है फरेबी,यहाँ लगती है घुटन ,
सच तो ये है य़ारों ,अब मैँ उूब रहा हूँ |
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दिल तो है उसका दारिया यहाँ हर तरफ है खतरा,
कोई तो बचा ले"तालिब" इसमे मैँ ढूब रहा हूँ |
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कौन कहता है ये कि मैं पानी के हूँ ऊपर ,
मर चुका हूँ इसलिये शायद अब तैर रहा हूँ |
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#तालिब #मंसूरी
बहुत खूबसूरत रचना तालिब जी। आपकी रचनाएं हमें बहुत प्रेरित करती हैं। इसी तरह खूब लिखिए और हम पाठकों का मनोरंजन करते रहिए।
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