पता.............भाटापारा छ.ग.
जि.बलौदाबाजार भाटापारा
राज्य............. छ.ग.
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
" दिव्य प्रेम पावन आँचल में ,
भरकर तुम फिर आ जाओ । "
गीत छंद विधान --- ताटंक छंद ,
यति --- (16,14 )
पदांत --- (222)
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
महकी सुगंध पुष्प बाग में,
कृष्ण भ्रमर गीत सुनाओ।
दिव्य प्रेम पावन आँचल में ,
भरकर तुम फिर आ जाओ।
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
ऊषा की लाली आभा से,
खिला ताल पर पंकज जब।
भोर देख खग लगा चहकने,
चमक रही ओंस तृणो पर।
विनती है ईश प्रभाकर से,
आभा सब पर फैलाओ।
दिव्य प्रेम पावन आँचल में ,
भरकर तुम फिर आ जाओ।
★★★★★★★
मिटा तिमिर सुंदर प्रभात से,
हुआ भोर पावन जग में।
मंदिर गुंजा शंख नाद से,
कलरव करती खग नभ में।
सुंदर सा छबि देख मुदित मन,
श्याम धरा पर आ जाओ।
दिव्य प्रेम पावन आँचल में ,
भरकर तुम फिर आ जाओ।
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★
स्वलिखित
कन्हैया लाल श्रीवास
भाटापारा छ.ग.
जि.बलौदाबाजार भाटापारा
No comments:
Post a Comment