Monday, December 16, 2019

ओडिशा से सावित्री मिश्रा की रचना- ख्व़ा़हिश

नाम -सावित्री मिश्रा
राज्य-ओडिशा ,झारसुगुड़ा
सम्पर्क -
ख्वाहिश


ख्वाहिश एक अथाह समंदर है मन की,
जो जीवन में इंधन का काम करती है।
किसी को जन्नत लुभाता कोई फरिश्ता चाहता,
मेरी हैं कुछ ख्वाहिशं जो आपसे साझा है करना।
बनूँ वट वृक्ष सी मैं औरों को शीतलता पहुँचाऊँ,
अडिग रहूँ पर्वतों सी कभी मुश्किलों से ना  घबराऊँ ।
सीखूँ नदियों से और अनवरत मंजिल को बढती जाऊँ,
चाहतें जो समंदर सी हैं उनको बूँद-बूँद भरती जाऊँ।
सबसे बड़ी ख्वाहिश मेरी मैं प्रकृति गुण को अपनाऊँ,
बनूँ प्रेरणा की बादल धरा पर प्रेम रस मैं बरसाऊँ ।
सूरज ना सही छोटा सा दीया बनने की ख्वाहिश है,
दुनिया ना सही आसपास गुलजार करने की ख्वाहिश है।

सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा,ओडिशा

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