Tuesday, December 17, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- शरीर और मन

नाम श्री स्वपन बोस
मोबाइल 9340433481
 शीर्षक - शरीर और मन


      
खेल जीवन का शरीर और मन से ही होता है ।
                इसलिए जीवन में हर पल तनाव रहता है ।

    शरीर की इच्छा सब कुछ खाकर ,अपना रुप छोड़ ,जाना होता है ।
             न मिले जगत में मान-सम्मान तो मन बड़ा रोता है ।

           मन का किया शरीर ही ढोता है ,शरीर और मन की कारनामे देख ।

                  आत्मा बहुत बैचेन होता है ।
             दिवस कर्म से थक हार कर शरीर सो जाता है ।

              मन की महिमा अपरंपार है , सपनों में भी जागता रहता है ।

                 मन अगर सध जाये तो ,नया जीवन मिल जाता है ।

                  पत्थर में भी है भगवान इंसान उसे देख लेता है।

               मिला है मिट्टी से यह शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाता है ।

              जिंदा नहीं होता ,वह मन और शरीर जो भगवान के
नियम विरुद्ध कर्म करता है ।

                 जो मन शरीर से उपर उठकर कर्म करता है ,जिंदा वही 
रहता है ।बाकी सब मिट जाता है 

             शरीर की बीमारी तो दर्द देती है ।
             मन की बीमारी तो बहुत बड़ी है ।जीते जी जीवन ले लेती है ।

      पर मन की आदत ऐसे होती है ,टिकता नहीं किसी एक जगह पर ,हर पल भटकता रहता है ।

         शरीर चलता मन से ।
           मन के अधीन सारा जहान है ।

             जो जीत जाये मन को 
               संसार में उसकी अलग पहचान है ।

          मन को जीत कर , कोई बुद्ध , कोई कृष्ण ,और राम हो जाते हैं ।

                मन और शरीर की कामनाओं में फंसकर । संसारी हर पल रोते है ।

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