शीर्षक -राहें मोहब्बत
राज्य - छत्तीसगढ़
राहें मोहब्बत
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भटकती रही राहें मोहब्बत में बेखबर,
तुम्हारी अदा अब लगती,
जहर क्यों है?
दर-दर ठोकरें खाती रही जहां में,
देखकर भी तुम्हारी नजरें
बेअसर क्यों है?
भूलों ना मधु यामिनी की
रसीली,ठिठोली, बातें,
अब तुम्हारी आँखों में भरी
ये जहर क्यों है?
मेरे हमदम तुम्हीं मेरे परवर दिगार,
कातिल अदाओं से भरी
ये जालिम हुनर क्यों है?
ना वो नजरें ना वो हसीन नजारें,
मातम में डूबा
ये शहर क्यों है?
स्याह अंधेरी रात बन गई जिंदगी,
हादसों ही हादसों का बरपा
कहर क्यों है?
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,( छ.ग )
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