Monday, December 30, 2019

छत्तीसगढ़ से नलिनी बाजपेयी की रचना- दहलीज

नाम-नलिनी बाजपेयी 
शीर्षक-दहलीज        
राज्य -छत्तीसगढ़              


                   दहलीज
तेरी दहलीज प्यारी थी,
जहां सबकुछ हारी थी बाबुल। 
तेरी दहलीज जन्नत से भी  
बड़ी न्यारी थी  बाबुल।

जिंदगी तेरे प्यार दुलार में बीती,
अब औरौं के रहमोकरम पर 
मां मुझे क्यों डाली थी।

सुरहीन संगीत हो गई,
ताज थी कभी बेताज
हो गई।

तेरे दर में आने के पहले 
किसी और की रजामंदी जरूरी
हो गई।         

तेरे यादों की दहलीज में,
सब कुछ छोड़ी थी बाबुल।

जो एहसासे चमन
 दिल से जोड़ा था,
वो प्यारी सी धरती,
वो न्यारी सी यादें।

वो माता की ममता,
जहां की कोई ना थी समता।
वो सारी कथानक पलकों की 
दहलीज में समेटी चली थी बाबुल।

याद आएंगी, बहुत रुलाएंगी,
धरती,आसमां सब हिला 
जाऊँगी।

तेरे आंगन,तेरी गलियां 
उसमें बसा प्यार,
सब कुछ दुर्लभ है ये बात 
सबको बता जाऊंगी।

तेरे इन्हीं आशीषों के सहारे
जिएं जाऊंगी बाबुल।

तेरी दहलीज प्यारी थी 
जहां सब कुछ हारी थी,
तेरी दहलीज जन्नत से 
भी बड़ी न्यारी थी,बाबुल।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर( छ. ग.)

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर दीद्दा

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  2. Bahut achhi sargarbhit Dil ki chhu Jane wali kawita hai .
    .

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  3. एक बेटी की पीड़ा को बेहतर रूप से आपने संजोया है,, गुरु माँ,, आपकी रचना के लिए मैं कुछ कहने वाला बहुत छोटा हूँ,, सारगर्भित।।।

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