Monday, December 9, 2019

छत्तीसगढ़ से परमानंद निषाद की रचना- नज़राना

कवि- परमानंद निषाद
शीर्षक- नजराना
राज्य- छत्तीसगढ़,जिला-बलौदा बाजार
मोब.- 7974389033
    
           *नजराना*
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ना नजर था ना नजराना था,
आपका आना था और हमारा जाना था,
क्या करे इसे किस्मत का खेल कहे,
और कहे इसे गैरो का अफसाना था,
जहां किस्मत हमसे रूठी और वो मान गये,
तब से हमने ईश्वर को जान गये,
इसके पहले हमे ना कोई पहचाना ना 
था नजर था ना नजराना था,
जब तुम यादों के झरोखों मे याद आते थे,
जब हम मिल के वो राग गाते थे,
कहना ना मुझे कभी तेरा दीवाना था,
था नजर था ना नजराना था ।।
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