Monday, November 4, 2019

राजस्थान से कवि बजरंग लाल सैनी "वज्रघन" की रचना- प्रेम का प्याला

कवि बजरंग लाल सैनी "वज्रघन"
राज्य राजस्थान
संपर्क 8769764786


शीर्षक - - - प्रेम का प्याला
आज पी आया मैं प्रेम का प्याला,
प्रिया के रससिक्त रक्ताभ अधरों की हाला,
हाला के उन्माद में मदमस्त होकर,
मन-मयूर नाचे सुध-बुध खोकर,
हृद् तल में उत्ताल हिलोरें झूम रही,
मानों उत्तुंग श्रृंग उठकर गगन को चूम रही,
फीकी लगती है अब तो जग की हाला,
आज पी आया मैं प्रेम का प्याला,
प्रिया के रससिक्त रक्ताभ अधरों की हाला,
हाला से रोम-रोम में मादकता छाई,
आनंद की एक लहर-सी मन में आई,
मन-भ्रमर अधर-कलिका को चूम-चूम,
अति आनंद मग्न हो रहा झूम-झूम,
"वज्रघन" अब शीतल लगती जग की हर ज्वाला,
आज पी आया मैं प्रेम का प्याला,
प्रिया के रससिक्त रक्ताभ अधरों की हाला।
बजरंग लाल सैनी

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