नाम:- गणपति सिंह
विधा :- कविता
शीर्षक:- एक बीज की यही कहानी
राज्य:- बिहार
विधा :- कविता
शीर्षक:- एक बीज की यही कहानी
राज्य:- बिहार
एक बीज की यही कहानी
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एक बीज पड़ा धरती पर
धूल उड़ा पड़ा बीज पर।
बरसात की बूंदों ने उसको
अंकुरित कर छोटा पौध बनाया है।
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छोटे पौधे को धूप, हवा
और पानी ने मिल सींचा है
अब सदाबहार बना है पेड़
फूल कली से लद मुस्काया है।
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पत्तियों में अमराई छाई
फलों से लदा, जवानी पाया है
गाता है मुस्काता है हरपल
प्रकृति का संरक्षण पाया है।
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है घना, पत्तियों से भड़ा डाली
दे छाया जीव जन्तु मानव को
पौधे ने जो खुशियाँ बिखेरी है
अडिग खड़ा सबका मन बहलाया है।
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एक बीज की यही कहानी
सबका मन बहलाते मुरझाया है
उसका अंग अंग भंग होकर
भव्य उपस्करों में समाया है।
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धूल उड़ा पड़ा बीज पर।
बरसात की बूंदों ने उसको
अंकुरित कर छोटा पौध बनाया है।
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छोटे पौधे को धूप, हवा
और पानी ने मिल सींचा है
अब सदाबहार बना है पेड़
फूल कली से लद मुस्काया है।
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पत्तियों में अमराई छाई
फलों से लदा, जवानी पाया है
गाता है मुस्काता है हरपल
प्रकृति का संरक्षण पाया है।
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है घना, पत्तियों से भड़ा डाली
दे छाया जीव जन्तु मानव को
पौधे ने जो खुशियाँ बिखेरी है
अडिग खड़ा सबका मन बहलाया है।
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एक बीज की यही कहानी
सबका मन बहलाते मुरझाया है
उसका अंग अंग भंग होकर
भव्य उपस्करों में समाया है।
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गणपति सिंह
छपरा बिहार
छपरा बिहार

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