नाम - शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक - वतन पुकारता है आ
सम्पर्क - ९०९८५१८९७६
पता- पेंडरवानी , बालोद , छ. ग.।
विधा - गीत
शीर्षक - वतन पुकारता है आ
सम्पर्क - ९०९८५१८९७६
पता- पेंडरवानी , बालोद , छ. ग.।
विधा - गीत
वतन पुकारता है आ
वतन पुकारता है आ ,
वतन पुकारता है आ ,
हिम् शिला सा उर कर,सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता है आ ...
वतन पुकारता है आ ,
वतन पुकारता है आ ,
हिम् शिला सा उर कर,सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता है आ ...
लूट रही है बेटियां, देश के समान ही,
मिट रही है अस्मिता , आओ जान में लेके जान भी ,
गर राष्ट्र के लिए शहीद हो गए जो तुम ,
गायेगी आवाम फिर तुम्हारी दास्तां
वतन ....
मिट रही है अस्मिता , आओ जान में लेके जान भी ,
गर राष्ट्र के लिए शहीद हो गए जो तुम ,
गायेगी आवाम फिर तुम्हारी दास्तां
वतन ....
अत्याचारी भ्रष्ट है, राष्ट्र शोक संतप्त है ,
अबाल-वृद्ध त्रस्त है, रो रहा है ये जहां s..s...s
आओ साथ-हाथ , बदल देंगें आसमां
वतन पुकारता ....
अबाल-वृद्ध त्रस्त है, रो रहा है ये जहां s..s...s
आओ साथ-हाथ , बदल देंगें आसमां
वतन पुकारता ....
अपने हो के , हो के गैर , भूल के हम मन के बैर ,
भूल के हम मन के बैर ,सबके लिए करे ये खैर ,
आज वक़्त है ये के जला दें नव ज्योत से राष्ट्र का हर समां
वतन पुकारता ...
हिमशिला सा उर कर ,
सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता...
भूल के हम मन के बैर ,सबके लिए करे ये खैर ,
आज वक़्त है ये के जला दें नव ज्योत से राष्ट्र का हर समां
वतन पुकारता ...
हिमशिला सा उर कर ,
सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता...
- शैलेन्द्र चेलक -

Badhiya😂
ReplyDeleteसच में सर बहुत ही ओजपुर्ण कविता
ReplyDeleteये परिपक्वता की निशानी है
हमारे लिए आपका शिष्य होना बड़े गर्व की बात है।
बहुत बढ़िया चेलक जी
ReplyDeleteआभार आप सभी का
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