Wednesday, November 20, 2019

छत्तीसगढ़ से शैलेन्द्र चेलक की रचना- वतन पुकारता है आ


नाम - शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक - वतन पुकारता है आ
सम्पर्क - ९०९८५१८९७६
पता- पेंडरवानी , बालोद , छ. ग.।
विधा - गीत

       वतन पुकारता है आ
वतन पुकारता है आ ,
वतन पुकारता है आ ,
हिम् शिला सा उर कर,सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता है आ ...
लूट रही है बेटियां, देश के समान ही,
मिट रही है अस्मिता , आओ जान में लेके जान भी ,
गर राष्ट्र के लिए शहीद हो गए जो तुम ,
गायेगी आवाम फिर तुम्हारी दास्तां
वतन ....
अत्याचारी भ्रष्ट है, राष्ट्र शोक संतप्त है ,
अबाल-वृद्ध त्रस्त है, रो रहा है ये जहां s..s...s
आओ साथ-हाथ , बदल देंगें आसमां
वतन पुकारता ....
अपने हो के , हो के गैर , भूल के हम मन के बैर ,
भूल के हम मन के बैर ,सबके लिए करे ये खैर ,
आज वक़्त है ये के जला दें नव ज्योत से राष्ट्र का हर समां
वतन पुकारता ...
हिमशिला सा उर कर ,
सिंधु सा तूफ़ां को धर ,
सबको साथ लेके चल ,बढ़ा विकास कारवां ,
वतन पुकारता...
       - शैलेन्द्र चेलक -

4 comments:

  1. सच में सर बहुत ही ओजपुर्ण कविता
    ये परिपक्वता की निशानी है
    हमारे लिए आपका शिष्य होना बड़े गर्व की बात है।

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया चेलक जी

    ReplyDelete
  3. आभार आप सभी का

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...