कवि अनिलशुक्ल
स्थान__जगदलपुर छतीसगढ़
शीर्षक_आकांक्षा
स्थान__जगदलपुर छतीसगढ़
शीर्षक_आकांक्षा
जीवन के राह में मेरी यही
आकांक्षा है की देश के काम
आऊं।
जब भी आऊं देश के तिरंगे में
लिपट कर आऊं।
दुश्मन को मार गिराऊं,सीमा पर माँ रणचण्डी को दुश्मन
का रक्त तिलक लगाऊं।
मेरी यही आकांक्षा है कि
विक्रम लेंडर को चंद्रमा पर
पुनः जीवीत कर।
नासा के आशा को जगाऊँ
यही आकांक्षा है मेरी की
मेरे परिवार को उत्तम नागरिक बनाऊं,समाज को
उन्नन्त राह पर ले जाऊं।
मेरी आकांक्षा है की पुनः
इतिहास को दुहराऊं
भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाऊं,।
नालन्दा के समान शिक्षा को
को दुहराऊं।
मेरी आकांक्षा है कि विश्व को
परमाणु हथियार से मुक्त कराऊँ, प्रदूषण मुक्त कराऊँ
कह अनिलशुक्ल मेरी आकांक्षा है कि मेरे निर्मल
स्वच्छ भारत में रहूं जब भी
जन्म मिले इसी भारत मे हे
ईश्वर आऊं।
आकांक्षा है की देश के काम
आऊं।
जब भी आऊं देश के तिरंगे में
लिपट कर आऊं।
दुश्मन को मार गिराऊं,सीमा पर माँ रणचण्डी को दुश्मन
का रक्त तिलक लगाऊं।
मेरी यही आकांक्षा है कि
विक्रम लेंडर को चंद्रमा पर
पुनः जीवीत कर।
नासा के आशा को जगाऊँ
यही आकांक्षा है मेरी की
मेरे परिवार को उत्तम नागरिक बनाऊं,समाज को
उन्नन्त राह पर ले जाऊं।
मेरी आकांक्षा है की पुनः
इतिहास को दुहराऊं
भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाऊं,।
नालन्दा के समान शिक्षा को
को दुहराऊं।
मेरी आकांक्षा है कि विश्व को
परमाणु हथियार से मुक्त कराऊँ, प्रदूषण मुक्त कराऊँ
कह अनिलशुक्ल मेरी आकांक्षा है कि मेरे निर्मल
स्वच्छ भारत में रहूं जब भी
जन्म मिले इसी भारत मे हे
ईश्वर आऊं।
कवि अनिलशुक्ल

सार्थक कविता सर
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