Monday, November 25, 2019

छत्तीसगढ़ से स्वपन बोस की रचना- मोहमाया

कवि स्वपन बोस
शिर्षक मोहमाया
पता जुगानी छत्तीसगढ़
मोबाइल 9340433481

        पकड़ सको तो पकड़ लो मुझे ,मैं तो तुझमें ही छुपा हूं ।
पकड़ रखा जीसे तुमने वह तो
झुठी मोह-माया है ।
                    मैं जब छोड़ जाता हूं तुझे तेरे अपने तुझे जला देते है
एक मुट्ठी राख बन जाता है तू ,
            गंगा में तुझे बहा देते है ।
ये दुनिया एक मेला है मैं साथ हूं।
तेरे तू नहीं अकेला है ।
देख गौर से यह कौन तेरा अपना है , मुश्किल में पास नहीं कोई तेरे
जगत दिवा सपना‌ है ।
    ये जो सुंदर तेरी काया है ।
     मिट्टी से बनी माया है ।
       बुढा़पा जब आता है ।
     तू बहुत घबराता है ।
                पांच दरवाजे वाले घर में मैं रहता हूं ।
जो दरवाजे पर रह जाये उसके पकड़ में नहीं आता हूं ।
          दरवाजे के बहार मोह-माया की सुन्दर दुनिया दिखती है
यह प्यार नहीं किसी से मतलब से
दुनिया चलती है ।
             मोह और बंधन होता नहीं हम बना लेते हैं ।
भगवान तो हर पल खड़े हैं हमारे पास पर , इच्छाओं के आंखों से ।
       देख नहीं पाते हैं ।
   
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