Monday, November 11, 2019

छत्तीसगढ़ से चेतन सिंह की रचना- मन की उपमा

कवि -चेतन सिंह
शीर्षक - *मन की उपमा*
राज्य - कसडोल , बलौदाबाजार ( छ ग)


मन मंदिर है ,यदि किसी की प्रतिमा सजी हो !
मन दर्पण है , यदि किसी की सूरत बसी हो !!

मन कवि है , यदि सुदृढ़ कल्पना शक्ति हो !
मन भगत है , यदि मीरा सी नीरा भक्ति हो !!

मन सागर है, यदि लहर - सी हलचल हो !
मन दिल है , यदि धडकन पल -पल हो !!

दिल की बात है कहना , तो मन मित्र है !
चुप यदि है रहना ,तो मन विचित्र है !!

मन भाई है  ,यदि रक्षाबंधन हो !
मन पवित्र है , यदि चरित्र चंदन हो !!

यदि निभा सकते हैं , तो मन नाता है ।
यदि पूज सकते हैं ,तो मन माता है !!

जाना है मंजिल तो , मन प्रकाश है !
पाना है साहिल तो , मन स्वच्छ आकाश है !!
मन सावन है ,यदि नयन बरसे !
मन साजन है  ,यदि  दूर हो प्रियतम नजर से !!
मन स्वप्न है , यदि मीठी निंदिया हो !
मन सच्चा देशभक्त है , यदि स्वदेश इंडिया हो !!

23 comments:

  1. Replies
    1. धन्यवाद अतुल !!

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  2. बहुत ही अच्छी रचना

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    1. धन्यवाद सर जी !

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    1. धन्यवाद महोदय !!

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  4. बहुत बहुत बधाई सर जी, कवि हृदय आप में है जिसे हमें अब पता चला है।

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    1. लिखने की आदत तो स्कूल जीवन से है , लेकिन कुछ समय के लिए लेखनी को आराम दे दिया था । उक्त ब्लॉग मे रचनाएं पढकर पुनः लेखन में प्रयास कर रहा हूँ ।
      आपका धन्यवाद महोदय !!

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  5. धन्यवाद महोदय !!

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  6. धन्यवाद महोदय !!

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  7. धन्यवाद महोदय !!

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  8. धन्यवाद महोदय !!

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  9. धन्यवाद महोदय!!

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  10. बहुत ही सुंदर रचना चेतन जी

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  11. This comment has been removed by the author.

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  12. सादर आभार महोदय जी !!

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